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लोकसभा का दंगल कब, और कैसे?

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लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व लोकसभा चुनाव जल्द ही होने हैं। सभी सियासी दलों की धड़कनें तेज हैं, जनता को रिझाने के लिए कई कोशिश की जा रही हैं, कोई राफेल में भ्रष्टाचार पर अपनी गुगली फेंक रहा है तो वहीं कोई सेना और जवानों के कंधे पर बंदूक रख चुनाव जीतना चाह रहा है। सभी सियासी दलों और देश की जनता को चुनावों के घोषणा का इन्तजार है। आज शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग अगले लोकसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है। आज शाम 5 बजे विज्ञान भवन में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। लोकसभा चुनाव के साथ ही 5 राज्यों आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भी हो सकता है. लोकसभा के चुनाव 7 से 8 चरणों में हो सकते हैं।

चुनाव आयोग की भाजपा को लंगडी

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अभी लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई नहीं है, लेकिन राजनैतिक दल प्रचार के नये हथकंडे ढूढने लगे हैं. इस सब में भाजपा सबसे आगे है, प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से जबर्दस्त चुनावी मोड में आ गये हैं. हाल ही में हुयी एयर स्ट्राइक के बाद तो भाजपा ने सैनिकों के नाम पर खुली राजनीति शुरू कर दी है. बैनर या पोस्टर या फिर मंच हर जगह सैनिकों की शहादत और वीरता का प्रचार सरकार के नाम के साथ जोड़ कर किया जा रहा है. इस पर रक्षा मंत्रालय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कुछ राजनितिक दलों के द्वारा सैनिकों के नाम और फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में करने की शिकायत की थी. चुनाव आयोग की ओर जारी बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह संज्ञान में लाया गया था कि कुछ राजनीतिक दल सुरक्षाबल के जवानों की फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार और राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं. कई शहीदों के परिवार ने भी नेताओं से ऐसे किसी प्रचार से बचने का निवेदन किया था. इसी का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को पत्र लिख जवानों के फोटो का इस्तेमाल ना करने निर्देश जारी किया है. चुनाव

सोनिया, राहुल, प्रियंका, अगला कौन!

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आजादी के बाद से ही देश की राजनीति एक परिवार के चारों ओर घूमती रही है, वैसे तो कांग्रेस ने आजादी के आन्दोलन या उसके बाद भी कई बड़े नेता देश को दिए हैं लेकिन सत्ता का मध्यबिंदु नेहरू गांधी परिवार ही रहा है. चाहे सत्ता में हो या फिर सत्ता से बाहर राजनीति इसी परिवार के इर्द गिर्द घूमती है. देश में दो प्रकार का मानस ही है एक वो जो इनके साथ है और दूसरा वो जो इनके खिलाफ है. पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने काफी कुछ गवांया है. आज कांग्रेस के पास अपनी कोई पुख्ता जमीन नहीं है लेकिन सत्ताभोग कर रही भाजपा और प्रधानमन्त्री मोदी ने रोज इस परिवार का जाप किया है. उनकी असली लड़ाई ये साबित करने की रही है कि इस परिवार ने देश को लूटा है. नेहरू से लेकर अब प्रियंका को भाजपा और उसके दिग्गज लगातार निशाना बना रहें हैं. इसका मतलब क्या है? जनता को समझना होगा. इससे पहले एक ताजे वाकये पर भी विचार करते हैं, पिछले पांच सालों में देश की राजनीति में एक नाम और उभरा वो है अरविन्द केजरीवाल, कोई अरविन्द को आन्दोलन या संघर्ष की पैदायश कहे लेकिन ये सच है कि कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल  के ही अरविन्द यहाँ तक पहुँच

चौकीदार चौकन्ना है और राफेल की फाइलें गुम हो गयी

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जल्द ही अगली लोकसभा के चुनाव होने हैं ऐसे में सियासी घमासान तेज हैं. एक ओर भाजपा खडी है दूसरी ओर समूचा विपक्ष. पिछले पांच सालों में भाजपा और मोदी शाह की टीम ने राजनीति को शह और मात का खेल बना दिया है. लोकतंत्र में आज सवाल करना एक अपराध और देश द्रोह माना जा रहा है. अब जब खुद भारत सरकार या सीधे शब्दों में कहें चौकन्ने चौकीदार की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये माना है कि राफेल की सीक्रेट फाइल चोरी हो गयी हैं. ये बात कोर्ट में अटोर्नी जर्नल वेणुगोपाल ने कही है. सुप्रीम कोर्ट में वेणुगोपाल कहते हैं कि इसकी जांच हो रही  है कि फाइल कैसे चोरी हुयी हैं. वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट में जब ये कहते हैं कि, "यदि अब सीबीआई को जांच के निर्देश दिए जातें हैं, तो देश को भारी नुकसान होगा". सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब राफेल सौदे से सम्बन्धित फैसला सुनाया था तो सरकार की ओर से कई तथ्यों को छुपाया गया था. जब प्रशांत भूषण ने हिन्दू में छपे एक लेख का हवाला दिया तो वेणुगोपाल ने कहा ये लेख चोरी कि गयी फाइल के आधार पर लिखा गया है और इस